Monday, 31 December 2018

गृहस्थ सार : 【भाग -2】आल्हा/वीर छंद

घर बाहर का मुखिया नर हो
और  नारि  घर  भीतर  जान
दोनों   ही  घर   के  संचालक
दोनों   का  ऊँचा    है  स्थान

बात करे जब मुखिया पहला
दूजा   सुने   चित्त    ले  चाव
बात उचित अनुचित है जैसी
वैसा  ही   वह    देय   सुझाव

बिना राय करना   मत  दोनों
चाहे    कैसा   भी   हो    काम
दोनों  ही  पहिये    हैं   घर  के
एक    दाहिना    दूजा     वाम

एक समझ  से  भली  रही  दो
दोनों   का  पद   एक   समान
दोनों ही   आधार   गृहस्थ  के
रखो    परस्पर    दोनों   मान

अगर  बात  मतभेद  लिये हो
तो  धर   लेना  इतना  ध्यान
जिसका जो अधिकार क्षेत्र  है
उसके  ही   कर    रहे  कमान

To be Continue....
All Rights Reserved.

उत्कर्ष गृहस्थ सार भाग-1 

utkarsh Kavitawali
Grahsth Saar ; Utkarsh Kavitawali

Sunday, 18 November 2018

गृहस्थ सार 【 भाग-1】aalha chhand

गृहस्थ : छंद - आल्हा/वीर,बृज मिश्रित
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जय जय जय भगवती भवानी
कृपा कलम पर   रखियो  मात
आज पुनः  लिख्यौ   है आल्हा
जामै     चाहूँ        तेरौ     साथ

महावीर      बजरंगी       बाला
इष्टदेव    मन  ध्यान   लगाय
निज  विचार   गृहस्थ  पर  मेरे
आल्हा  में   भर   रह्यो  सुनाय

नर  नारी  दोनों   ही    साधक
सर्जन  पालन  जिनकौ  काम
एकम एक बनौ  मिल  गृहस्थ
कठिन  साधना     बारौ   नाम

बात  कहूँ  गृहस्थ  की पहली
रखो   बंधुवर   जाकौ   ध्यान
नहीं  बुराई   करौ   नारि   की
जातै   जुडौ   आपकौ    मान

एक   अकेले  में   चल  जावै
भरी  भीर   में    दीजौ  ध्यान
नारि सोचती है  कछु  ज्यादा
करियौ   वही   करे  गुणगान

बात    दूसरी    मर्यादा    की
भूले  ते   मत    हाथ   उठाय
नैनन कौ  डर  नैनन   में   हो
नैनन   ते    दीजौं   समझाय

हँसी मजाक घड़ी भर करियों
ज्यादा   करी  करै    नुक़सान
नारि  बदै  अरु  नैक  सुनें  ना
बाद   लगें    संकट   में   प्रान

तीजी बात   सोच   आधारित
करो  बात   पे  जरा    विचार
बिना  कलह  लगता  है सुंदर
कच्चे, पक्के  घर   कौ   द्वार

माँग नारि की बिन  सोचे  ही
पूर्ण करो मत बिल्कुल  मीत
जुड़ा हुआ है कल इससे  ही
और छिपी  इसमें   ही  जीत

तीन माँग हों यदि  नारी  की
सोच समझ कर पहली मान
दूजी टाल आजकल  करके
तीजी कर  न,भले  धनवान

चौथी  बात  कमाई    वाली
कितनी होती मासिक आय
भूले   ते  मत  भेद  बताओ
लेना     मित्रो  आय  छुपाय

खर्चा  पानी   घर  कौ  सबरौ
करनौ कितनौ पति कौ काम
भेद खुलत  पानी  ज्यौ जावै
चाहे   पास   लाख   हौ दाम

क्रमशः जारी.... अगले अंक में
Gruhsth

Tuesday, 25 September 2018

कृष्ण-राधिका संवाद (दोहे)

आजाऔ मिलबे सजन, जमना जी के पार
तड़प रही   हूँ  विरह में, करके   नैना  चार


कैसे  आऊँ   मैं   प्रिया, जमना  जी के पार
घायल  मोहे  कर   गए, तेरे   नयन   कटार


तुम  तौ  घायल है गए, देख  कोउ कौ रूप
मैं  बैरानिया  हूँ   बनी, तेरी  जग   के  भूप


मैं   तेरौ   हूँ   राधिका, और  साँच  ई प्यार
आधौ  हूँ   तेरे   बिना, तू     मेरौ    आधार


छलिया कारे  मोहना, नाय  बात    में सार
कोस रही मैं स्वयं को, क्यों कर बैठी प्यार

  ✍नवीन श्रोत्रिय"उत्कर्ष"
   +91 95 4989-9145

Tuesday, 18 September 2018

रक्ता छंद [Rakta Chhand ]

रक्ता छंद [Rakta Chhand ] 

विधान :-  

रगण जगण गुरु【212 121 2 】कुल  
7 वर्ण, 4 चरण [दो-दो चरण समतुकांत]

(1)
मात   ज्ञान  दीजिये
दूर   दोष     कीजिये
मंद   हूँ   विचार   दो
लेखनी    सँवार   दो
(2)
मात       हंसवाहिनी
आप   ज्ञान  दायिनी
अंध   को  तार      दो
कष्ट   ये   निवार दो
Utkarsh Kavitawali
रक्ता छंद [Rakta Chhand ]

Tuesday, 11 September 2018

कुंडलियाँ Kundaliyan Chhand

 कुंडलियाँ  Kundaliyan Chhand 

【सोमवार】

देवो     के    वह   देव  है, भोले     शंकर     नाम
ध्यान धरो नित नेम से, अंत  मिले   हरि   धाम
अंत   मिले    हरिधाम, पार   भव   के   हो  जाये
मनचाहा   सब    होय, साथ  सुख   समृद्धि  पाये
कहे    भक्त    उत्कर्ष, नाव   भव   से  प्रभु  खेवो
मैं      मूर्ख      नादान, मार्ग   दो    मुझको  देवो

【मंगलवार】


बजरंगी    महावीर     का, है    ये  मंगलवार
राम    नाम   के  साथ  जप, होवे     बेड़ापार
होवे     बेड़ा      पार, बात  यह  उर  में  धारो
संकट      होवे     दूर, आप  हनुमान उचारो
कहे  भक्त   उत्कर्ष,नाथ   दुखिया  के संगी
शंकर  के   अवतार,वीर     बाला     बजरंगी

【बुधवार】


मंगलफल दाता प्रभो,गणनायक, गणराज
सुमिरन  करते  आपका,तुरत सँवारो काज
तुरत  सँवारो  काज,साथ मति   मोहे  दीजै
रहे  न  बाद  विकार,देव  तुम   इतना कीजै
कहे   दास   उत्कर्ष,शरण  जो   कोई आता
मनेच्छा    करे   पूर्ण,देव  मंगल फल दाता

【गुरूवार】


भूलो  मत  गुरुदेव   को,गुरू  गुणों  की खान
दिवस आज गुरुदेव का,करो आप सब ध्यान
करो  आप  सब ध्यान,सफल तब ही हो पावें
गुरू   ज्ञान     के   दीप,बात  यह  वेद बतावें
भूल    गुरू   नादान,अधर में क्यों तुम झूलो
कहे    शिष्य    उत्कर्ष,गुरूजी को मत भूलो

【शुक्रवार】


संतोषी    का  वार   है,शुक्र    आज   का  वार
हर  इच्छा  पूरण  करे,देती     ख़ुशी     अपार
देती   ख़ुशी   अपार,ध्यान  माँ का जो धरता
त्यागे मलिन विचार,शरण माँ की जो पड़ता
मिले    कर्म   को   दंड,बचे   कब  कोई  दोषी
कहे   दास   उत्कर्ष,बोल    जय  माँ  संतोषी

【शनिवार】

पूजा कर शनि वार को,कर लो शनि का ध्यान
कर्मो    का   फल  देत  ये,कर्मो   के   भगवान
कर्मो     के    भगवान,पार   नैया   ये    करते
मिटे सकल निज पाप,शरण  इनकी जो पड़ते
कहे   भक्त  उत्कर्ष,मार्ग  नही   कोई     दूजा
गया   वही   भव   पार,देव  को   जिसने पूजा

  रविवार  
रविवार  को  सूर्य    का , करें आप सब जाप 
तन मन दोनों  स्वस्थ हो, मिटे साथ ही पाप 
मिटे साथ ही   पाप, बुध्दि वैभव मिल जाता 
ओज  पराक्रम  बढ़े, दिव्यता  प्रभु  से  पाता 
कहे  भक्त  उत्कर्ष, प्रार्थना     रही   आधार 
सब   वारों  में  बड़ा, मान  ये दिवस रविवार 

✍नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष"

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Sunday, 9 September 2018

उड़ियाना व कुण्डल छंद [ Udiyana Or Kundal Chhand ]

 उड़ियाना  छंद 

Udiyana Or Kundal Chhand

उड़ियाना  छंद विधान : 12/10 यति पहले व बाद
में त्रिकल अंत मे एक गुरु
जीवन का ध्येय एक, राम नाम जपना
मिले हमें विष्णुलोक,यही सत्य सपना
कौन  यहाँ मित्र,सगा, बंधु,  संबंध    है
माया   का यही जाल, मोह  आबंध   है

कुण्डल छंद

कुण्डल छंद विधान : 12/10 यति पहले व बाद
में त्रिकल अंत मे क्रमशः  दो गुरु

राम  नाम  जाप करो, मोह   जाल  टूटे
मृत्यु  लोक   फेर सदा, जाप  करें   छूटे
हो  ये  भव पार जीव,जन्म  मृत्यु  भूलें
भूलें  जो  राम  नाम,इसी   बीच   झूलें
- नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
श्रोत्रिय निवास बयाना
उड़ियाना व कुण्डल छंद [ Udiyana Or Kundal Chhand ]
उड़ियाना व कुण्डल छंद [ Udiyana Or Kundal Chhand ]


Wednesday, 5 September 2018

कहमुकरी छंद - 2 [kehmukariyan]

 कहमुकरी छंद 

विधान : प्रतिचरण 15 अथवा 16-16
मात्राऐं, क्रमशः दो दो चरण समतुकांत

वह     भविष्य    का       है   निर्माता
पथभ्रष्टी        को     पथ   पे   लाता
कर्म      मार्ग    का    वही  निरीक्षक
क्या  सखि ईश्वर? ना सखि शिक्षक

अज्ञान      मेट      सज्ञान    बनाता
खेल       कूद    भी    वही  सिखाता
नहीं    तनिक   उसके  मन  में  मद
ऐ ! सखि  ईश्वर ? ना सखि ज्ञानद

अंधकार        को      दूर     भगाता
एक     इसी   में    वह  सुख   पाता
कांति      पुंज   का  है   वह   रक्षक
ऐ ! सखि दीपक,ना  सखि शिक्षक

जाति      पाँति    सब    वही बनाये
झूठ       साँच    के    जाल   बिछाये
एक          वही    जो     लेता    देता
ऐ सखि ईश्वर ? नहि   सखि   नेता

कभी     कभी  मुझको    दिखता  है
पता      नहीं  वो    क्यों    छुपता  है
भोर     सुहानी     सुनु      जो   शोर
क्या सखि साजन,नही  सखि मोर

रोज    रोज     सपनो    में    आये
सखी   नित्य   वह    मुझे   सताये
मन   मधुवन    में   करे    वो  शोर
ऐ ! सखि साजन ? न   माखनचोर
- नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष



Sunday, 2 September 2018

बेरोजगारी : unemployment

बेरोजगारी : Unemployment

आज अखबार में विज्ञापन छपा था, विज्ञापन के साथ ही पूछताछ के एक सम्पर्क अंक (नम्बर) भी,नवनीत सुबह सुबह चाय की चुस्की ले अखबार पढ़ रहा, अचानक उसकी निगाह उस विज्ञापन पर गयी । चाय का कप टेबल पर रख कर दोनों हाथों में अखबार को ले विज्ञापन पढ़ने लगा ।
"कुशल इंजीनियर की की आवश्यकता वेतन अनुभव व योग्यता के आधार पर" , तुरन्त ही नवनीत में संपर्क नम्बर पर सम्पर्क कर बाकी जानकारियां ले ली ।
पूछताछ के बाद नवनीत ने तुरंत ही अपनी ऑफिस फोन कर के आज का अवकाश ले लिया । फोन पर बताये अनुसार ही नवनीत साक्षात्कार के लिये समय रहते ही निश्चित स्थान पर पहुँच गया । बहुत लम्बी लाइन लगी थी, कुल 5 जगहों पर लगभग 40 लोग साक्षात्कार के लिये वहाँ पहुँचे थे ।
देश मे बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है,जिसका फायदा अप्रत्यक्ष रूप में सब कम्पनियां उठा रही है ।
नवनीत का 10वां नम्बर था, साक्षात्कार के वक्त मन मे अनबन सी बनी रहती है, पता नहीं क्या पूछेंगे ? बड़ी मुश्किल से एक नौकरी नजर आई है वह भी हाथ से चली न जाये । यही सब सोच नवनीत भी सहमा हुआ था । हालांकि वह एक कम्पनी में अभी भी कार्यरत था, वहाँ पिछले 15 वर्ष से वेतन बढोत्तरी न होने की वजह से वह परेशान था ।
इतनी महंगाई में 10-15 हजार रुपये से घर का चूल्हा भी न सिगले । ऊपर से किराये का मकान,बिजली बिल, राशन, भाड़ा, इन्हीं खर्चों के दबाव में आज दूसरी कम्पनी चुनने का विचार मन मे आया ।
तभी उसके कान में आवाज आई, "नवनीत" , यस मैडम और वह सहमा सहमा सा आवाज की दिशा में आगे बढ़ गया ।



क्या मैं अंदर आ सकता हूँ मैडम ?
यस कम इन.... सिट डाउन
धन्यवाद मैडम
अपने डॉक्यूमेंट लाइये...
जी मैडम ...लीजिये
मैडम ने शौक्षणिक योग्यता सम्बन्धी सभी दस्तावेज बारिकी से पढ़ें ।
ओह ! बहुत अच्छे.... आपने बीटेक 80 प्रतिशत नम्बर से पास की है ।
इतने अच्छे नम्बर है फिर  क्या आपने  कभी सरकारी नौकरी के लिये ट्राई नहीं किया ।
जी मैडम किया था, कई बार ट्राई किया था पर सामान्य वर्ग में होने की वजह से सलेक्शन नहीं हो पाया ।
मैडम : ओह.. ये बात है... सामान्य वर्ग में होने से क्या फर्क पड़ता है ।
नवनीत ने अभी इस प्रश्न का जबाव देना ठीक नहीं समझा ।
मैडम : अच्छा ये बताओ, आपको इसी कम्पनी में नौकरी क्यों चाहिए ?
नवनीत : मैडम सच पूछो तो इस प्रश्न का उत्तर अभी मेरे पास  नहीं है ? पर सच्चाई  यही  है  मैडम कि बेरोजगार लोगों  को नौकरी चाहिये भले ही वह किसी भी  कम्पनी  में क्यों न हो ।
मैडम : इस कम्पनी से जुड़कर, पाँच वर्ष बाद आप अपने आप को कहाँ देखते हैं ?
नवनीत : इस सवाल का को सुनकर उसका मन विचलित हो गया,ये वही सवाल था जो आज से पन्द्रह वर्ष पहले एक इंटरव्यू में सुना था ।
यह सवाल सुनकर नवनीत ने एक बारगी चुप्पी साध ली, फिर लम्बी साँस लेकर बोला... हमारे देखने से क्या होता है मैडम ये बेरोजगारी जहाँ  चाहेगी वहीं रहेंगे । और नैनो से जलधार फूट पड़ी ।
बेरोजगारी -UNEMPLOYMENT-UTKARSH POETRY
UNEMPLOYMENT : बेरोजगारी


Thursday, 30 August 2018

महाभुजंगप्रयात [Mahabhujangprayat]

महाभुजंगप्रयात [Mahabhujangprayat]

विधान : महाभुजंगप्रयात छंद
आठ  यगण  से है बना, बारह पर यति सोय ।
भुजंगप्रयात से दोगुना, सदा  छंद  यह होय ।।
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लगी  है   झरी   धार  पैनी  परी  हैं,
लिये  नीर आईं ,घटा घोर कारी ।

चली   हैं  हवायें  डरी  सी   निगाहें,
बचेगी न खेती  हुई आज भारी ।

रहा  कर्ज   में   हूँ  रहूँगा  सदा  ही,
मिली भाग  में  ये गरीबी हमारी ।

करूँ क्या कहो,राह कोई दिखाओ,
धरा पुत्र का कष्ट काटो बिहारी ।।
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नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष,बयाना

Monday, 27 August 2018

घनाक्षरियों के प्रकार व विधान

  घनाक्षरियों के प्रकार एवं विधान 

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1:- मनहरण घनाक्षरी : कुल 31 वर्ण। 8-8-8-7 या 16-15 पर यति। अंत में गुरु वर्ण।
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2:- रूप घनाक्षरी :  कुल 32 वर्ण। 8-8-8-8 या 16-16 पर यति। अंत में गुरु लघु होता है।
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3 :- देव घनाक्षरी  : कुल 33 वर्ण। 8-8-8-9 पर यति। चरणान्त में नगण। 
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4:- जलहरण घनाक्षरी :  कुल 32 वर्ण। 8-8-8-8 या 16-16 पर यति। चरणान्त में लघु लघु होता है।(कहीं कहीं लघु गुरु या लघु लघु लघु भी देखा जा सकता है) 
_______________________________________
5:- जनहरण घनाक्षरी :  कुल 31 वर्ण। पहले 30 वर्ण लघु और अंत में गुरु होता है।
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6:- डमरू घनाक्षरी : कुल 32 वर्ण। सभी वर्ण बिना मात्रा के लघु वर्ण होते हैं।
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7:- विजया घनाक्षरी:  कुल 32 वर्ण। 8-8-8-8 पर यति।प्रत्येक यति अंत में लघु गुरु "या नगण" और पद सानुप्रास होता है।
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8:- कृपाण घनाक्षरी:   कुल 32 वर्ण। 8-8-8-8 पर यति। अंत में गुरु लघु होता है।(प्रत्येक यति के अंत में गुरु लघु व पदानुप्रास होता है) 
____________________________________________
9:- हरिहरण घनाक्षरी : कुल 32 वर्ण।8-8-8-8 पर यति। "प्रत्येक यति" के अंत में लघु लघु व "पदानुप्रास" होता है।
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10:- सूर घनाक्षरी :  कुल 30 वर्ण। 8-8-8-6 अंत में गुरु या लघु कुछ भी हो सकता है।
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Ghanakshri chhand ka vidhan
Naveen Shrotriya Utkarsh


Saturday, 18 August 2018

रट लै रट लै हरी कौ नाम

रट  लै  रट लै हरी कौ नाम

रट  लै  रट लै हरी कौ नाम, प्राणी  भव  तर  जायेगौ
रे प्राणी  भव   तर  जायेगो, तेरो जनम सुधर जायेगौ
रट लै रट लै हरि कौ......

बड़े  जतन  तन  मानुस  पायौ
मोहपाश  में    समय   गँवायौ
कोउ न  आवै  काम अंत में, रे  जब   ऊपर  जायेगौ
रट लै रट  लै  हरि  कौ नाम, प्राणी  भव तर जायेगौ

पाँच गुणन  की   काया  प्यारी
मल   मल  चमड़ी गई निखारी
चले साथ  प्राणन  के बल पे, रे  पीछे   मर  जायेगौ
रट  लै  रट  लै हरी कौ नाम, प्राणी भव  तर जायगौ

सब प्राणिन  की  है  ई नगरी
कर्मन  ते  भर  जीवन  गगरी
पाप   पुण्य  पावै  तू  बूही, हाथन    कर     जायेगौ
रट लै तट लै हरी कौ नाम, प्राणी  भव   तर जायेगौ

पर  पीरा   कूँ  अपनी  कर ले
दया भाव करुणा मन  भर ले
भव  कौ  मेलौ चले अनवरत रे  याय  उबर  जायेगौ
रट  लै  रट  लै  हरी कौ नाम प्राणी  भव तर जायेगौ
-
नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”
श्रोत्रिय निवास बयाना

latest hindi bhajan
रट  लै  रट लै हरी कौ नाम

Wednesday, 8 August 2018

उल्लाला छंद [Ullala Chhand]

उल्लाला छन्द
विधान- 13- 13 मात्रा प्रति चरण सममात्रिक 
समचरणान्त में तुकान्त,  मात्रा  दोहे  के प्रथम
चरण के जैसे है । चरणान्त गुरु या लघु लघु
उदा•
गुरु किरपा से  सब  मिला, गुरु  जीवन आधार हैं
गुरु बिन ध्यान ना ज्ञान है, गुरु भव तारणहार हैं
गुरु  चरणों  में   है   मिला, मुझको जीवन सार है
गुरु  आज्ञा   जो    मानता, उसका    तो   उद्धार है



Friday, 3 August 2018

विश्वगुरू भारत [ India ]

  विश्व गुरु भारत अपना महान  

विश्व गुरु भारत अपना महान 
नही  कोई दूजा इसके समान 
नही कोई दूजा.....नही कोई...
विश्व गुरु............नही कोई...


सिक्ख ईसाई हिन्दू मुस्लिम,
सब  मिलजुल  कर  रहते  है
सुख दुख अपना आपस बांटे,
साथ  सभी  का,  हम देते  हैं
बाँटा भारत ने जग  को ज्ञान
नही कोई दूजा,इसके समान

नही दूजा...............
विश्व गुरु...............
जाति   धर्म  का भेद भूलकर,
सबकी   रक्षा   करे  सिपाही
तन मन अपना किये समर्पित,
करता  सीमा  की  रखवाली
खड़ा सीमा पे अडिग जवान
नही कोई  दूजा इसके समान

नही दूजा...............
विश्व गुरु...............
प्रीत    हमारी   रीत  सदा से,
हर   दिल   कान्हा  बसते  है
स्वामिभक्त वह,दुर्गादास हम,
जान   हथेली   पे   रखते  है,
मातृभूमि  को  अर्पित  प्रान,
नही दूजा...............
विश्व गुरु...............


Vishvguru bharat
Deshbhakti Poem song


गीतिका : हिंदी की जय बोलो [geetika]

हिंदी   की    जय   बोलो  हिंदी, भाषा  बड़ी सुहानी है
हिंदी   गौरव  हिन्द  देश  का, हिंदी हरि की वाणी है

है  मिठास  हिंदी भाषा मे, पुरखो का यह  मान रही
वीरों का भुजबल थी ये ही, अपना  स्वाभिमान  रही
 
मात  भारती  के  ललाट पे, तेज   लिये  जो  बिंदी है

और  नहीं  दूजी  कोई  वह, केवल   अपनी   हिंदी है

बूढ़ी  आँखे  साक्ष्य  रही वो, जिनमे  जन्मे थे सपने
इंकलाब   से   आजादी  तक,हिंदी  साथ  रही अपने

गैरों  ने  तो  बर्बरता  से, सीने   पर  आघात  किया
भूलो मत भारत के  लालो, हिंदी  ने ही  साथ दिया

बड़े चाव  से  जिसे  सहेजा, वह  जंजीर  गुलामी की
जरा सोचना कीमत क्या है,मौन भरी इस हामी की

बड़े  कष्ट  झेले  थे  तब ही, यह  आज़ादी   पाई   है
बाद गुलाम बने रहने की,कहो ! कसम क्यों खाई है

नाग कालिया  के  कारण ही, तो दूषित  कालिंदी है
सुनो ! देश  के  वीर युवाओं,उसी तरह अब  हिंदी है

हाथ बढाकर हाथ मिलाओ,फिर से स्वप्न सजाना है
सोने की चिड़िया को फिर से,शीर्ष  ताज  पहनाना है

बिना  देर  के तजो  युवाओं,किये  स्वयं  को वंदी हो
बोलो  आनंदित होकर   के, भाषा   केवल  हिंदी हो

✍नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
    श्रोत्रिय निवास बयाना


geetika-Doha
HIndi Love Geetika-Doha


Thursday, 2 August 2018

सवैया : काव्यगोष्ठी

मत्तगयंद सवैया : 

  भगण×7+गुरु+गुरु  

सूरकुटी   पर  भीर भयी, कवि मित्र करें मिल कें कविताई ।
छन्दन गीतन  प्रीत झरे, उर  भीतर  बेसुधि  प्रीत  जगाई ।
भाग   बड़े   जब सूरकृपा, चल  सूरकुटी  बृज  आँगन पाई ।
देख   छटा  बृज पावन की,उर  आज  नवीन गयौ हरसाई ।

saviaya
Mattgyand savaiya : story mirror reward




Sunday, 22 July 2018

दोहे [doha]

पालीथिन    से   मर रही, गायें  रोज़  हज़ार ।
बन्द करो उपयोग अब, नही जीव को मार ।।

वर्षो  तक    गलता नही,नही नष्ट जो होय ।
दूषित पर्यावरण करे,नाम पॉलिथिन सोय ।।

कपडे   का थैला रखो,छोड़ पॉलिथिन आज ।
वर्षो   तक गलता नही,दूषित करे समाज ।।

मांग   भरी तुझ नाम की,हाथ मेहँदी रंग ।
हरे  कांच की चूड़ियां,पहन चली वो संग ।।

परिणय   कर  प्रीतम चले,छोड़ उसे,परदेश ।
पूछ    रही   वो   गोरडी,कब  आवोगे देश ।।

हरे कांच की चूड़ियां,तके  पिया    की राह ।
विरह दुख संताप में,पल पल भरती आह ।।

लिखी प्रेम की पातरी,सजनी साजन नाम ।
सूनो तुम बिन घर लगे,सूनो  सगरो गाम ।।

सजन पढ़े जब पातरी,जीव गयो अकुलाय ।
जल्द    मिलेंगे  जोगनी,काहे  रही सताय ।।

Utkarsh poetry : उत्कर्ष कवितावली
Utkarsh Dohawali
Utkarsh Membership

Doha chhand doha vidhan doha udaharn
Utkarsh Dohawali




आराधना : Aaradhana

 आराधना : Aaradhana 

दोहा•
प्रातः उठ वंदन करूँ,चरण नवाऊँ शीश ।
यशोगान तेरा करूँ, इतना दो आशीष ।।
सुन लो मेरी  अरज   भवानी ।  तेरी   महिमा   जग  ने   जानी ।।
दूर करो   अज्ञान  का  साया ।  माता   तेरीे    दर    पे     आया ।।
दोहा•
करता  में   आराधना, माता   सुनो पुकार ।
इस मूरख नादान का, कर   दो  बेडा पार ।।
कृपा    करो   माँ    शेरोवाली ।  भर   दो   झोली    मेरी    खाली ।।
सच्चे   मन से जो  भी ध्यावे ।  संकट     उसके    पास  न अावे ।।
विपति पड़ी  तब आप उबारा ।  रूप    सहस्त्र    लिए   अवतारा ।।
तुम   ही  गौरा आदि भवानी ।   तुम   ही  शारद  जग कल्याणी ।।
जो भी    तेरी शरण में आया ।  रिद्धि - सिद्दी धन सम्पति पाया ।।
भटक  रहा  मैं  सुनो भवानी ।   राह     दिखाओ     माता   रानी ।।
दो•
सच के मारग पे चलूँ,छोड़  सभी  जंजाल ।
तेरी   सेवा   में   करूँ, चाहे  जो  हो  हाल ।।
✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
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Utkarsh poetry : उत्कर्ष कवितावली



Monday, 16 July 2018

नारी / Naari (गजल)

 नारी: गजल [ Naari : Gazal ]

 बह्र : 212-212-212-212 
भूख उसको भले पहले'खाती नहीं
दुःख हों  लाख ही पर जताती नहीं

Bhookh  Usko Bhale Pehle  Khaati nahi
Dukh   Hon  Lakh   Hi   Per  Jatati nahi

नित्य  जल्दी जगे  काम  सारा करे
बाद  भी  वो  यहाँ प्यार पाती नहीं

Nitya  Jaldi  Jage  Kaam  Sara  Kare
Baad  Bhi Wo Yahan Pyar Paati nahi

घुट रही  ओट में  और रस्मों में' वो
लोग   कहते  उसे  लाज आती नहीं

Ghut  Rahi  Oat Me Aur Rasmon  Me Wo
Log   Kehte    Use    Laaz    Aati     Nahi

दीप  तुम  भी नहीं हो उजाले लिये
और  कहते  उसे तम मिटाती नहीं

Deep  Tum  Bhi Nahi Ho Ujale Liye
Aur  Kehte  Use  Tam  Mitati  Nahi

और चाहे न कुछ चाह  है प्यार की
कर  न पाये  कहें वो निभाती नहीं

Aur  Chahe na Kuchh Chaah Hai Pyar ki
Ker  na  paaye  Kahen  Wo Nibhati nahi

दायजे  की  चिता  में  जलाते  रहे
नारि  “उत्कर्ष” वो  दीपबाती नहीं

Dayje   Ki   Chita  Me  Jalate  Rahe
Naari  Utkarsh  Wo Deepbaati Nahi

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अन्य चुनिंदा रचनाएँ, कृपया इन्हें भी पढ़ें। 

1. Vivah Vidai Geet : विदाई गीत  2. महाशृंगार  

Saturday, 7 July 2018

छंद : मंदाक्रांता छंद - Mandakranta Chhand

मंदाक्रांता छंद

--------------------
   [ विधान : मगण,भगण,नगण,तगण,तगण,गुरु,गुरु]  
____________________________
मर्यादा  मारग तज,चले लोग वो चाल देखो ।
माया के, मोहवश उनके  जो रहे हाल देखो ।
हैं  वो निर्भीक,सभय नही,ईश से घाल देखो ।
होना  है अंत,समय बढ़ा जा रहा,काल देखो ।
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष

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छंद : मंदाक्रांता [mandakranta chhand]

 छंद : मंदाक्रांता 
--------------------
( मगण  भगण नगण  तगण  तगण   गु गु )
-------------------------------------------------------
माँ   वागीशा, विनय  करता,आप  ही  हो सहारा
विद्या दात्री,मति विमल दो,हो  न  ये अंधियारा
शिक्षा की माँ अलख द्युति से,ज्ञान गंगा बहाऊँ
ईर्ष्या,  माया  तज  जगत  में नाम उत्कर्ष पाऊँ
- - - नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
utkarsh kavitawali
छंद : मंदाक्रांता 

Monday, 2 July 2018

मुक्तक : हिन्दू,हिंदी,हिंदुस्तान

मुक्तक : हिन्दू,हिंदी,हिंदुस्तान

जय - जयकार  करेगी  दुनिया,हिंद   वीर  मतबारों की
अडिग हिमालय सी हिम्मत है,आदत  नही  सहारो की
ठान   लिया   हमने  हिंदी  को,शीर्षस्थ      पहुंचाना  है
जग   में   केवल  हिंदी   होगी,हिंदी राज   दुलारों   की 
मुक्तक छंद
Muktak


Tuesday, 19 June 2018

बाद जिंदगी यूँही ढल जायेगी [bhajan]

!! बाद  जिंदगी यूँही ढल जायेगी !!

बिना हरि नाम  के  जीने वालो,
जाम मद  मोह, का पीने वालों,
जाप हरि नाम का करके देखो,
जाम हरि नाम का पीकर देखो,

गति  सुधरेगी,ओ भोले   पंछी,
उम्र बाकी भी सम्भल जायेगी,
बाद जिंदगी यूँही  ढल जाएगी,

जैसे इस तन को नित धोते हो,
वैसे ही  मन  को  अब धोना है,
काटना  है हमको जो भी कुछ,
ठीक  वैसा ही तो हमें बोना है,

खुशियों  वाली नयी सुबह होगी,
आई   विपदा   भी  टल जायेगी,
बाद  जिंदगी  यूँही ढल जायेगी,

आज  के काज कल  पे छोड़ो ना,
मैं  में  आकर  रिश्ते  तोड़ो   ना,
बोलो   है  कौन  पराया  जग में,
रक्त तो लाल सबकी रग रग में,

प्रेम   के  गीत  गाओ, गाने   दो,
सोचो   तो,  सोच  बदल जाएगी,
बाद   जिंदगी  यूँही ढल जायेगी

जिसको  देख  बड़ा  इतराते  हो,
अंत  उसे  छोड़  यहीं  जाते   हो,
व्यर्थ  मोह  का  ताना   बाना है,
खाली कर आये खाली जाना है,

है जो धन दौलत इन आँखों मे,
वो  ही एक   रोज  छल जायेगी,
बाद  जिंदगी  यूँही ढल जायेगी,

जियो  आप   औरों  को  जीने  दो,
प्रीत   रस   बाँट   सबको  पीने दो,
द्वेष हृदय में न तुम कभी भरना,
कड़वा  सच जान सभी का मरना,

बाकी   बचती   है  केवल   वाणी,
धूल  जब  धूल में  मिल जायेगी,
बाद  जिंदगी  यूँही  ढल जायेगी,
✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”
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नाम : नवीन शर्मा श्रोत्रिय
उपनाम : उत्कर्ष
पिता : श्री रमेश चंद शर्मा
माता : श्रीमति ललिता शर्मा
जन्म : 10 मई 1991
जन्म स्थान : ग्राम - नरहरपुर,तहसील- वैर,जिला - भरतपुर (राज•) 321408
वर्तमान निवास : उपखण्ड - बयाना,जिला भरतपुर (राजस्थान) 321401
शिक्षा : स्नातकोत्तर (हिंदी)
सीनियर अकाउंटेंट
लेखन : गद्य-पद्य दोनों में (छंद, गीत,गजल,निबंध,कहानी,लघुकथा)
लेखन : लगभग 26 जून 2016 से
उपलब्धि : आपकी रचनाये अलग अलग राज्यो से कई पत्रिकाओं में प्रकाशित,
काव्य मंच : 1. उज्जैन, 2. अपनाघर आश्रम, 3. बयाना

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Krishna Bhajan कृष्ण भजन

कृष्ण भजन  Krishna Bhajan उनसों  का  प्रीत  रखें, जिन प्रीत  काम की करनी तो  उनते,करें, मुक्ति भव  धाम की घर ते  चले जो आज, मिल...

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