Sunday, 22 July 2018

दोहे [doha]

पालीथिन    से   मर रही, गायें  रोज़  हज़ार ।
बन्द करो उपयोग अब, नही जीव को मार ।।

वर्षो  तक    गलता नही,नही नष्ट जो होय ।
दूषित पर्यावरण करे,नाम पॉलिथिन सोय ।।

कपडे   का थैला रखो,छोड़ पॉलिथिन आज ।
वर्षो   तक गलता नही,दूषित करे समाज ।।

मांग   भरी तुझ नाम की,हाथ मेहँदी रंग ।
हरे  कांच की चूड़ियां,पहन चली वो संग ।।

परिणय   कर  प्रीतम चले,छोड़ उसे,परदेश ।
पूछ    रही   वो   गोरडी,कब  आवोगे देश ।।

हरे कांच की चूड़ियां,तके  पिया    की राह ।
विरह दुख संताप में,पल पल भरती आह ।।

लिखी प्रेम की पातरी,सजनी साजन नाम ।
सूनो तुम बिन घर लगे,सूनो  सगरो गाम ।।

सजन पढ़े जब पातरी,जीव गयो अकुलाय ।
जल्द    मिलेंगे  जोगनी,काहे  रही सताय ।।

Utkarsh poetry : उत्कर्ष कवितावली
Utkarsh Dohawali
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Doha chhand doha vidhan doha udaharn
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आराधना : Aaradhana

 आराधना : Aaradhana 

दोहा•
प्रातः उठ वंदन करूँ,चरण नवाऊँ शीश ।
यशोगान तेरा करूँ, इतना दो आशीष ।।
सुन लो मेरी  अरज   भवानी ।  तेरी   महिमा   जग  ने   जानी ।।
दूर करो   अज्ञान  का  साया ।  माता   तेरीे    दर    पे     आया ।।
दोहा•
करता  में   आराधना, माता   सुनो पुकार ।
इस मूरख नादान का, कर   दो  बेडा पार ।।
कृपा    करो   माँ    शेरोवाली ।  भर   दो   झोली    मेरी    खाली ।।
सच्चे   मन से जो  भी ध्यावे ।  संकट     उसके    पास  न अावे ।।
विपति पड़ी  तब आप उबारा ।  रूप    सहस्त्र    लिए   अवतारा ।।
तुम   ही  गौरा आदि भवानी ।   तुम   ही  शारद  जग कल्याणी ।।
जो भी    तेरी शरण में आया ।  रिद्धि - सिद्दी धन सम्पति पाया ।।
भटक  रहा  मैं  सुनो भवानी ।   राह     दिखाओ     माता   रानी ।।
दो•
सच के मारग पे चलूँ,छोड़  सभी  जंजाल ।
तेरी   सेवा   में   करूँ, चाहे  जो  हो  हाल ।।
✍नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”©
     +9184 4008-4006 , +91 95 4989-9145
bhajan, geet, bhakti
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Utkarsh poetry : उत्कर्ष कवितावली



Monday, 16 July 2018

नारी / Naari (गजल)

 नारी: गजल [ Naari : Gazal ]

 बह्र : 212-212-212-212 
भूख उसको भले पहले'खाती नहीं
दुःख हों  लाख ही पर जताती नहीं

Bhookh  Usko Bhale Pehle  Khaati nahi
Dukh   Hon  Lakh   Hi   Per  Jatati nahi

नित्य  जल्दी जगे  काम  सारा करे
बाद  भी  वो  यहाँ प्यार पाती नहीं

Nitya  Jaldi  Jage  Kaam  Sara  Kare
Baad  Bhi Wo Yahan Pyar Paati nahi

घुट रही  ओट में  और रस्मों में' वो
लोग   कहते  उसे  लाज आती नहीं

Ghut  Rahi  Oat Me Aur Rasmon  Me Wo
Log   Kehte    Use    Laaz    Aati     Nahi

दीप  तुम  भी नहीं हो उजाले लिये
और  कहते  उसे तम मिटाती नहीं

Deep  Tum  Bhi Nahi Ho Ujale Liye
Aur  Kehte  Use  Tam  Mitati  Nahi

और चाहे न कुछ चाह  है प्यार की
कर  न पाये  कहें वो निभाती नहीं

Aur  Chahe na Kuchh Chaah Hai Pyar ki
Ker  na  paaye  Kahen  Wo Nibhati nahi

दायजे  की  चिता  में  जलाते  रहे
नारि  “उत्कर्ष” वो  दीपबाती नहीं

Dayje   Ki   Chita  Me  Jalate  Rahe
Naari  Utkarsh  Wo Deepbaati Nahi

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अन्य चुनिंदा रचनाएँ, कृपया इन्हें भी पढ़ें। 

1. Vivah Vidai Geet : विदाई गीत  2. महाशृंगार  

Saturday, 7 July 2018

छंद : मंदाक्रांता छंद - Mandakranta Chhand

मंदाक्रांता छंद

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   [ विधान : मगण,भगण,नगण,तगण,तगण,गुरु,गुरु]  
____________________________
मर्यादा  मारग तज,चले लोग वो चाल देखो ।
माया के, मोहवश उनके  जो रहे हाल देखो ।
हैं  वो निर्भीक,सभय नही,ईश से घाल देखो ।
होना  है अंत,समय बढ़ा जा रहा,काल देखो ।
नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष

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छंद : मंदाक्रांता [mandakranta chhand]

 छंद : मंदाक्रांता 
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( मगण  भगण नगण  तगण  तगण   गु गु )
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माँ   वागीशा, विनय  करता,आप  ही  हो सहारा
विद्या दात्री,मति विमल दो,हो  न  ये अंधियारा
शिक्षा की माँ अलख द्युति से,ज्ञान गंगा बहाऊँ
ईर्ष्या,  माया  तज  जगत  में नाम उत्कर्ष पाऊँ
- - - नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
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छंद : मंदाक्रांता 

Monday, 2 July 2018

मुक्तक : हिन्दू,हिंदी,हिंदुस्तान

मुक्तक : हिन्दू,हिंदी,हिंदुस्तान

जय - जयकार  करेगी  दुनिया,हिंद   वीर  मतबारों की
अडिग हिमालय सी हिम्मत है,आदत  नही  सहारो की
ठान   लिया   हमने  हिंदी  को,शीर्षस्थ      पहुंचाना  है
जग   में   केवल  हिंदी   होगी,हिंदी राज   दुलारों   की 
मुक्तक छंद
Muktak


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नाम : नवीन शर्मा श्रोत्रिय
उपनाम : उत्कर्ष
पिता : श्री रमेश चंद शर्मा
माता : श्रीमति ललिता शर्मा
जन्म : 10 मई 1991
जन्म स्थान : ग्राम - नरहरपुर,तहसील- वैर,जिला - भरतपुर (राज•) 321408
वर्तमान निवास : उपखण्ड - बयाना,जिला भरतपुर (राजस्थान) 321401
शिक्षा : स्नातकोत्तर (हिंदी)
सीनियर अकाउंटेंट
लेखन : गद्य-पद्य दोनों में (छंद, गीत,गजल,निबंध,कहानी,लघुकथा)
लेखन : लगभग 26 जून 2016 से
उपलब्धि : आपकी रचनाये अलग अलग राज्यो से कई पत्रिकाओं में प्रकाशित,
काव्य मंच : 1. उज्जैन, 2. अपनाघर आश्रम, 3. बयाना

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Krishna Bhajan कृष्ण भजन

कृष्ण भजन  Krishna Bhajan उनसों  का  प्रीत  रखें, जिन प्रीत  काम की करनी तो  उनते,करें, मुक्ति भव  धाम की घर ते  चले जो आज, मिल...

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