Saturday, 16 March 2019

पर मानी न मैंने भी हार

पर  मानी  न  मैंने  भी  हार

हर   दिवस   सहा    स्वजनी   प्रहार
पर    मानी      न     मैंने     भी  हार
न     कभी   झुका   न कभी रुका हूँ
पथरीले        से        नहीं    डरा   हूँ

दूना        प्रयास      किया    हरबार
पर   मानी    न     मैंने      भी    हार 

मस्तिष्क     पटल   पर   लक्ष्य  एक
इसके      दूजा     था    नहीं     शेष
 चल    रहे   अनवरत    कई     युद्ध  
जिनके    चलते    मन   हुआ   क्रुद्ध

जीवन      का     भूला    नहीं   सार
पर      मानी    न    मैंने     भी   हार

जीतों          की     आपाधापी    थी
वो    सर्द     रात    भी     स्वापी थी
हर    ओर   लगी    थी   आग   नयी
जाने    कितनों    की     जान   गयी

चहुँ      दिशि    हो    रहा   नरसंहार
पर    मानी     न     मैंने     भी   हार

ज्यों   ज्यों   चढ़ा  लक्ष्य  का  ज़ीना
कठनाई       ने       ताना       सीना
दुर्बलता    करती ,  नित        झीना
क्या   इसको     कहते    हैं    जीना

अंतर्मन        में        हुई     तक़रार
पर    मानी   न     मैंने     भी    हार

बल     में   बदली   फिर   कमजोरी
करता       श्रम     मैं    चोरी   चोरी
सुख   शय्या    को     मैने     छोड़ा 
खुद   को   कितनी     बार   मरोड़ा

रखे     सदा   ही    सार्थक   विचार
पर   मानी     न    मैंने     भी    हार

जीवन     के    दो     रहे    छोर  है
एक   शाम    अरु    एक    भोर है
सुख    दुख   कर्मों    के  अनुगामी
नहीं    भाग्य   की    इसमें   ख़ामी

हुई     कुशल    रणनीति     तैयार
पर    मानी    न   मैंने      भी  हार
Naveen Shrotriya Utkarsh
Per Maani Na Maine Bhi Haar

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18 comments:

  1. बहुत सुंदर और सकारात्मक भावों से भरी गेयता से भरपूर रचना प्रिय नवीन जी। होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।

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    1. सराहना के लिये आपका दिल से आभार व्यक्त करता हूँ ।
      आपको एवं आपके समस्त स्नेहीजनों को भी प्रेमरंगों के महापर्व होली की अनन्त बधाइयाँ

      Delete
  2. अती उत्तम उत्कर्स जी।

    ReplyDelete
  3. अती उत्तम उत्कर्स जी।

    ReplyDelete
  4. अती उत्तम उत्कर्ष जी ।

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर, संघर्ष को प्रेरित करती रचना नवीन जी। बधाई और रंगों के पावन पर्व की हार्दक शुभकामनाएँँ💐💐

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    1. हार्दिक आभार मालती जी, आपको व आपके समस्त स्नेहीजनों को होली के महापर्व की हार्दिक बधाइयाँ

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  6. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 17/03/2019 की बुलेटिन, " होली का टोटका - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. बेहतरीन प्रस्तुति 👌

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    Replies
    1. सराहना के लिये हार्दिक आभार अनिता जी

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  8. अतिसुंदर पंक्तियां नवीन भाई।

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नाम : नवीन शर्मा श्रोत्रिय
उपनाम : उत्कर्ष
पिता : श्री रमेश चंद शर्मा
माता : श्रीमति ललिता शर्मा
जन्म : 10 मई 1991
जन्म स्थान : ग्राम - नरहरपुर,तहसील- वैर,जिला - भरतपुर (राज•) 321408
वर्तमान निवास : उपखण्ड - बयाना,जिला भरतपुर (राजस्थान) 321401
शिक्षा : स्नातकोत्तर (हिंदी)
सीनियर अकाउंटेंट
लेखन : गद्य-पद्य दोनों में (छंद, गीत,गजल,निबंध,कहानी,लघुकथा)
लेखन : लगभग 26 जून 2016 से
उपलब्धि : आपकी रचनाये अलग अलग राज्यो से कई पत्रिकाओं में प्रकाशित,
काव्य मंच : 1. उज्जैन, 2. अपनाघर आश्रम, 3. बयाना

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