Saturday, 15 June 2019

Top Romatic Shayari-Muktak

MUKTAK

चलाये   बाण    नैनों   के, बना  उनका  निशाना दिल 
चढ़ी फिर आशिकी हमपे, लगें  उजड़ी सभी महफ़िल 
नहीं  है  और कुछ चाहत, बने   वो    ही   में'री दुल्हन 
बने  वो  ही  दुल्हन   मेरी,रही जो  आज  की कातिल

तुम्हारी    आरजू   गर  ये, तुम्हे  अपना   बना    लूँगा

नजर  में  एक तुम  होंगी, नयन  में   यूँ   बसा   लूँगा
नहीं   मालूम    ये  सजनी, किसी की चाह थी कितनी
मगर  इतना समझ लेना, पलक   पर  मैं  बिठा लूँगा

चलों   करलें   प्रिया  परिणय, जुदाई   को  न सहना है
वचन  ले  सात   जन्मों का, हमें   अब   साथ रहना है
वरण जग  रीति   से  करके, मिलन होगा  हमारा तब
बने   हम    एक    दूजे  को, जमाने   से   ये  कहना है

करो    हरि  का  भजन  तुम  नित्य मेरे साथ में यारो

भले   हम   हों  अँधेरे   में,मगर  औरों  को मिल तारो
नहीं   है   उम्र  कोई  राधिका   माधव  को   जपने की
जपा   मेरी   तरह   जो   पाओगे, जसलीन  सी  पारो

बिना  विचारे   कर्म  करें  जो, वह   पीछे    पछताते हैं
ऐसा   मैंने    कहा  नहीं   पर, ऐसा     सभी   बताते हैं
धीरज  धारण करने की  भी, तो   कुछ  सीमा होती है
इस  धीरज  की आड़  लिये, वे केवल  समय गँवाते है

कर्म करोगे  तो  निश्चित ही, फल को तुम पा जाओगे

बिना  कर्म  के  बोलो  कैसे, तुम  अधिकार जताओगे
कर्म  बड़ा है  सदा भाग्य से, मन में  इतना  भर  लेना
मनचाही  मंजिल तुम मित्रो, एक   इसी   से  वर लेना

कोई   शिकवा  शिकायत हो,खबर इसकी हमें करना

हमें   मालूम   कब  उलझन,मगर  पर पीर को हरना
रहेगा    वक्त    न    ऐसा,छटेंगे  दुःख  के  ये  बादल
समुंदर    जो   ये  यादों   का,नही  तुम  देखकर डरना

रहा   ये    पल   बड़ा   दुर्लभ, रहा बचपन बड़ा प्यारा

नहीं    शिकवे   गिले  कोई, नहीं   मन  हार  से  हारा
कहाँ   डर   है  बसा  उर  में, कहाँ  मनलोभ पनपा है
मिले   है  मीत  मन  से  मन,मिले  है प्यार  से यारा

लिखूँ  क्या गीत गजलें छंद जब मनमीत  रूठा  हो

कहाँ   आराम   नैनो   को  जहाँ  हर स्वप्न झूठा हो
सदा   दिल  जोड़ने  में  ही  उमर  अपनी  बिताई है
कहो  कैसे  सहेगा   दिल  किसी  को  जोड़  टूटा हो

हम   टूट  से  गये  सजना   आप  जोड़िये

यूँ  बेवजह  कभी   हम  से मुँह  न मोड़िये
इन दूरियाँ  को  खत्म  करो भूल मानकर
जो  कल गुजर गया उसको आज छोड़िये

कभी   मेरी   तुमसे   मुलाकात    होगी

नैन   से    नैनों  की  अगर  बात   होगी
फिजा महक उठेंगी उस दिन सावन सी
प्रेम  से  प्रेम   की  तब   बरसात  होगी

मुक्तक [बह्र : 221 212 2,2 212 122]


है  इश्क  नाम  क्या  ये,बिन बूझ ठँस गए हैं

हो   दर्द   लाख   हमको, हम देख  हँस गए है
लेकर   हमें  कहाँ   से, देखो  कहाँ    है'  लाई
कर  प्रेम   बेवफा   से, हम यार  फँस गए है

देखकर    झूठ  को सत्य    झुकने लगा

है सही  क्या  गलत  सार   छुपने लगा
धन जगत की निगाहों में' रम  सा गया
बाद  रिश्तों   का दम  आप  घुटने लगा

जहाँ    पर   प्रीत   बसती  है, जहाँ    सद्भाव  धारा है

जहाँ  अपनत्व  कण कण में,जहाँ सबको  सहारा है
जहाँ    पर   शूर  है   जन्मे, जहाँ  की  रज भभूती है
जगत   में  पूज्य,  जगप्रिय,वतन  भारत  हमारा है


पिता पाटन  सदा गृह के,प्रसू आधार  है  मित्रो 
सुता गृह  मान बेटा वंश का उजियार  है  मित्रो 
बने दीवाल रिश्तों की,हुआ निर्माण तब घर का 
जहाँ हो मेल इन सबका,वही  परिवार  है मित्रो 

लबों  को    चूमकर   तेरे, लुटा   दूँ   प्रीत मैं अपनी
बनाकर हमसफ़र अपना, दिखा दूँ जीत मैं अपनी
नहीं  है   खेल   ये   कोई, मुहब्बत   की फतह है ये
दिवानों  को   दिखा  दूँगा, दिवानी  रीत  मैं अपनी

- नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
+91 95 4989-9145
All Hindi Litrature Chhand
Utkarsh Chhandawali

Sunday, 9 June 2019

Muktak : मुक्तक

जीव  के  कर्म  पर  जीव  का   अवतरण
जीव   ऊपर    चढ़ा    मृत्तिका   आवरण
कर्म    ऐसे    करो   मानवी     तन  मिले
सद्गुणों  का  करो, सबहि  अब अनुशरण
Muktak Utkarsh kavitawali
Muktak : Utkarsh Kavitawali

गर्मी पर कुण्डलिया

गरमी

गरमी   ते  गरमी  मिली, गरम  रह्यो फिर आज
गरमी  ते  गरमी   घटी, कैसौ     गरम    रिवाज
कैसौ    गरम    रिवाज, ठंड     पे   बहुतै  भारी 
हुये     अधमरे   आज, गरमी    है   अत्याचारी 
सुनौ   सखा   उत्कर्ष, रखौ   रसना   में  नरमी 
वरना      उल्टे     हाथ, परे   तुमकू   ई  गरमी
   
   नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष
  श्रोत्रिय निवास बयाना
उत्कर्ष कवितावली
गरमी /Summer

प्रेम क्या है ? What Is The Love

किसी ने पूछा प्रेम क्या है ? तब मेरे अंतःकरण से जो जवाब बन पड़ा वह आपके समक्ष रखता हूँ  प्रेम आत्मा का राग है, चित्त का अनुराग  है, रिश्तों का भाग है वैरागी का वैराग है, भक्ति  की लाग है, अर्थात  प्रेम आत्मा का वह भाव, वह सम्प्रेषण  का  माध्यम  है, जो  दूर  से  ही  जीव  का  जीव  से  मिलन  करा  देता  है, वह  अहसास  है जो एक चट्टान  में  भी  प्रभु  का  साक्षात्कार  करा  देता  है, प्रेम    वह हथियार है जो  बड़े  से बड़े  दुश्मन को पल में  मात दे सकता है, वह ज्ञान है जो  भक्त  को  भगवान  से  मिला  देता  है, वह मनोभाव  है  जो  हमें  जीवन  जीना  सिखलाता  है । प्रेम वह हलाहल  है  जो  कालकूट से भी ज्यादा प्रभावशाली है, "प्रेम" प्रेम है  मगर इसके जैसा अन्य कोई नहीं यह अद्वितीय है |
उत्कर्ष कवितावली
प्रेम क्या है ? What is the love

Ghnakshari Chhand

 Ghnakshari Chhand 
जाति -पाँति धर्म नहीं, काम भेड़ियों की कोई
ऐसे  भेड़ियों  को अब, मिल     मार   डालिये

सामाजिक  सौहार्द को, कमजोरी  मान   रहे
ऐसे शन्तिदूतों को भी, घर   से    निकालिये

करते  वे   नित  पाप, क्षमा  दान  देते   आप
दानवीर   बनके    यूँ, संकट    न      टालिये

दूध  पिलाने   का  जो  शौक है चढ़ा हुआ तो
श्वानों को पिलाओ पर, साँप  मत    पालिये
उत्कर्ष कवितावली
घनाक्षरी छन्द

Saturday, 8 June 2019

मनहरण कवित्त [घनाक्षरी छंद] Manharan Kavitt [Ghnakshari Chhand ]

 Manharan Kavitt Chhnad 

घनाक्षरी छंद : मनहरण कवित्त


रावण  के  जैसा कृत्य, करते   है  आज   वही
जिनको  है भान नहीं, राम    के    प्रताप  का

रोम  रोम  उनका तो, काम,  लोभ  जपता है
मोह   परिपूर्ण   होके, नाश     करें    आपका

भूल    बैठे  रावण ने, पाया देखो  विष्णुलोक
स्वयं संग  उद्धार तो, किया  पूरी   खांप   का

रावण  के  जैसा बुद्धि, जीवी कहो कौन भला
दोनों के बुरे  हैं  कर्म, रहा   फर्क    नाप   का
Ravan or Aaj ka ravan
घनाक्षरी छंद मनहरण कवित्त

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अक्षय गौरव जन०-मार्च अंक

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About Writer

नाम : नवीन शर्मा श्रोत्रिय
उपनाम : उत्कर्ष
पिता : श्री रमेश चंद शर्मा
माता : श्रीमति ललिता शर्मा
जन्म : 10 मई 1991
जन्म स्थान : ग्राम - नरहरपुर,तहसील- वैर,जिला - भरतपुर (राज•) 321408
वर्तमान निवास : उपखण्ड - बयाना,जिला भरतपुर (राजस्थान) 321401
शिक्षा : स्नातकोत्तर (हिंदी)
सीनियर अकाउंटेंट
लेखन : गद्य-पद्य दोनों में (छंद, गीत,गजल,निबंध,कहानी,लघुकथा)
लेखन : लगभग 26 जून 2016 से
उपलब्धि : आपकी रचनाये अलग अलग राज्यो से कई पत्रिकाओं में प्रकाशित,
काव्य मंच : 1. उज्जैन, 2. अपनाघर आश्रम, 3. बयाना

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Krishna Bhajan कृष्ण भजन

कृष्ण भजन  Krishna Bhajan उनसों  का  प्रीत  रखें, जिन प्रीत  काम की करनी तो  उनते,करें, मुक्ति भव  धाम की घर ते  चले जो आज, मिल...

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